फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर (Computer Fundamental in Hindi)

कंप्यूटर का परिचय (Introduction of Computer in Hindi)

यदि आप एक कंप्यूटर छात्र हैं या आप किसी प्रतियोगी परीक्षा (Competitive Examination) की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको “फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर (Computer Fundamental in Hindi)” के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। क्योंकि जब आप कोई प्रतियोगी परीक्षा देते हैं, तो आपसे कंप्यूटर फंडामेंटल (Computer Fundamental) से प्रश्न पूछे जाएंगे।

अब, सभी सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में, कंप्यूटर की बेसिक जानकारी (Computer Basic Knowledge in Hindi) यानी कंप्यूटर फंडामेंटल का ज्ञान अनिवार्य हो गया है।

फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर (Computer Fundamental in Hindi)

इसे ध्यान में रखते हुए, आज हम आपको कंप्यूटर फंडामेंटल्स (Computer Fundamental in Hindi) के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण विषयों जैसे कि कंप्यूटर क्या है, कंप्यूटर के प्रकार, कंप्यूटर कैसे काम करता है, कंप्यूटर का इतिहास, जनरेशन ऑफ कंप्यूटर, कंप्यूटर की विशेषताएं, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, इनपुट एंड आउटपुट डिवाइस, कंप्यूटर के अनुप्रयोग, कंप्यूटर के फायदे और नुकसान को जानेंगे, जिन्हें अच्छी तरह से समझने से आप कंप्यूटर के बेसिक (Basic of Computer in Hindi) से संबंधित किसी भी प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं।

आधुनिक कंप्यूटर (Modern Computer) कई वर्षों की कड़ी मेहनत, अद्भुत आविष्कारों और दुनिया भर के शोधकर्ताओं (Researchers) और संगठनों (Organizations) द्वारा बड़ी संख्या में हुए उपयोगी खोजों का परिणाम हैं।

जिसका परिणाम आज का आधुनिक कंप्यूटर है जिसका उपयोग हम वर्तमान में कर रहे हैं। आइए अब हम आधुनिक कंप्यूटर के बारे में विस्तार से जानते हैं। कंप्यूटर शब्द अंग्रेजी के “Compute” शब्द से बना है, जिसका अर्थ है “गणना“, इसीलिए इसे कंप्यूटर कहा जाता है। कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक (Electronic) मशीन है जिसका उपयोग इनफार्मेशन के स्टोरेज और प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है। जैसा कि हम जानते हैं की कंप्यूटर अपने आप काम नहीं कर सकता। यह उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए निर्देशों (Instructions) के अनुसार काम करता है।

कंप्यूटर कैसे काम करता है? (How Computer Works in Hindi)

कंप्यूटर एक बहुत ही जटिल मशीन (Complex Machine) है, लेकिन मूल रूप से, यह इनपुट-प्रोसेस-आउटपुट (IPO) मॉडल का पालन करता है। कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो डेटा (Data) को स्वीकार करता है, इसे निर्देशों (Instructions) के आधार पर प्रोसेस (Process) करता है और हमें आउटपुट (Output) देता है। इनपुट-प्रोसेस-आउटपुट (IPO) मॉडल सिस्टम एनालिसिस (System Analysis) और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (Software Engineering) में व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला मॉडल है।

ipo cycle in computer in hindi

  • इनपुट (Input) : कंप्यूटर को कीबोर्ड, माउस आदि जैसे इनपुट डिवाइस (Input Device) का उपयोग करके दिए गए डेटा और निर्देश को इनपुट के रूप में जाना जाता है। इनपुट का उपयोग करके कंप्यूटर वांछित कार्य करता है।
  • प्रोसेस (Process) : इनपुट डिवाइस से प्राप्त डाटा को तब सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) में प्रोसेस किया जाता है। सीपीयू का काम निर्देशों को प्रोसेस करना, कैलकुलेशन (Calculation) करना है। सीपीयू न केवल इनपुट डिवाइस के साथ संचार करता है, बल्कि वांछित कार्यों को करने के लिए आउटपुट और स्टोरेज डिवाइस के साथ भी संचार करता है।

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) के दो विशिष्ट कॉम्पोनेन्ट होते है:

  1. अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) : यह गणितीय (Mathematical) और लॉजिक (Logic) संबंधी क्रियाकलापों को प्रोसेस (Process) करता है।
  2. कंट्रोल यूनिट (CU) : यह कंप्यूटर के सभी कार्यों को नियंत्रित (Control) करता है, और कंप्यूटर की सभी गतिविधियों जैसे इनपुट, आउटपुट डिवाइस, प्रोसेसर आदि के बीच तालमेल बैठाता है।
  • आउटपुट (Output) : डाटा प्रोसेस होने के बाद, या वांछित कार्य पूरा होने के बाद, यह आउटपुट डिवाइस (Output Device) के माध्यम से आपको आउटपुट किया जाता है। सरल शब्दों में आउटपुट प्रोसेसिंग के बाद मिलने वाला रिजल्ट (Result) है। आउटपुट डिवाइस एक कंप्यूटर को आपके साथ इंटरैक्ट करने में सक्षम बनाते है। ये डिवाइस एक स्क्रीन पर सूचना प्रदर्शित करते हैं, प्रिंट कॉपी बनाते हैं या साउंड उत्पन्न करते हैं। इनमें से कुछ आउटपुट डिवाइस मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर और हेड फोन हैं।
  • स्टोरेज (Storage) : कंप्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामों (Results) को कंप्यूटर के अंदर या बाहर सुरक्षित रखने के उपकरणों को स्टोरेज (Storage) के नाम से जाना जाता है। हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD), सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD) और यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB) सबसे लोकप्रिय स्टोरेज डिवाइस (Storage Device) हैं।

कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का इतिहास आदिम काल का है, जब मनुष्यों के पास ऐसा उपकरण होना आवश्यक था, जिसकी मदद से वे आसानी से अपने मवेशियों की गिनती कर सकें और दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली गणनाओं को आसानी से समझ सकें। तब से, मनुष्य आधुनिक कंप्यूटर के निर्माण के लिए तेजी से और अधिक सटीक और स्वचालित गणना करने वाले उपकरण को बनाने की कोशिश कर रहा है।

यह कहा जाता है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। कंप्यूटर के लिए भी यही सच है। कंप्यूटरों का इतिहास विशेष रूप से मवेशियों की गिनती रखने की आवश्यकता से शुरू होता है। जल्द ही, उन्होंने एक गिनती संख्या प्रणाली (Number System) विकसित की और शायद गिनती के लिए कंकड़ का उपयोग करना शुरू कर दिया। 3000 ईसा पूर्व में, चीनी (Chinese) ने अबेकस (Abacus) विकसित किया, जिसे मानव जाति द्वारा बनाए गए पहले गणना उपकरण के रूप में देखा जाता है।

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इसके बाद 1617 ई. में, जॉन नेपियर (John Napier) एक स्कॉटिश गणितज्ञ ने नेपियर्स बोन्स (Napier’s Bones), एक मैनुअल कैलकुलेटिंग डिवाइस विकसित किया, जिसके आधार पर आज का कंप्यूटर विकसित हुआ है। आधुनिक कंप्यूटर मुश्किल से 50 साल पुराने हैं, लेकिन उनके विकास का इतिहास बहुत पुराना है। कंप्यूटर किसी न किसी तरह से हमारे जीवन के हर पहलू में शामिल हैं। पिछले चार दशकों में, कंप्यूटर ने हमारे समाज में रहने और काम करने के तरीके को बदल दिया है।

नीचे दिए गए पॉइंट्स में, हमने कंप्यूटर के इतिहास की टाइमलाइन को समझाया है।

  • अबेकस (Abacus) : अबेकस एक गिनती यंत्र है, जो लकड़ी के फ्रेम और गोलाकार मोतियों से बना होता है और इसका उपयोग जोड़, घटाव, विभाजन और गुणन करने के लिए किया जाता है। इसका आविष्कार चीन में हुआ था।
  • नेपियर्स बोन्स (Napier’s Bones) : नेपियर्स बोन्स में जानवरों की हड्डियों से बने आयताकार पट्टियाँ थीं, जो मैन्युअल रूप से संचालित होने वाला गणना उपकरण है। जिसका आविष्कार स्कॉटिश गणितज्ञ जॉन नेपियर (John Napier) ने किया था।
  • पास्‍कलाइन (Pascaline) : पास्‍कलाइन एक मैकेनिकल कैलकुलेटर (Calculator) है जिसका उपयोग जोड़ने, घटाने और गिनती करने के लिए किया जाता है। जिसका आविष्कार 17 वीं शताब्दी की शुरुआत में ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) द्वारा किया गया था।
  • लेबनीज का मैकेनिकल कैलकुलेटर (Stepped Reckoner) : यह एक डिजिटल मैकेनिकल कैलकुलेटर है जिसका आविष्कार जर्मन गणितज्ञ गॉटफ्रीड विल्हेम लिबनीज (Gottfried Wilhelm Leibniz) ने किया था। यह एक ऐसी मशीन है जो गुणा और भाग कर सकती है। इस मशीन को स्टेप्ड रेकनर (Stepped Reckoner) भी कहा जाता है।
  • जैक्वार्ड लूम (Jacquard Loom) : यह पहला मैकेनिकल करघा (Loom) था। इस मशीन में, बुनाई के डिजाईन डालने के लिए छिद्रित कार्ड का उपयोग किया जाता था। इसका आविष्कार 1801 में जोसेफ मैरी जैक्वार्ड (Joseph Marie Jacquard) द्वारा किया गया था।
  • डिफरेंस इंजन (Difference Engine) : डिफरेंस इंजन एक मैकेनिकल कैलकुलेटर था। जिसे 1822 में चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) द्वारा विकसित किया गया था। यह संख्याओं के कई सेटों की गणना करने और परिणामों की हार्ड कॉपी बनाने में सक्षम है। इस मशीन में शॉफ्ट और गियर लगे हुए थी तथा यह मशीन भाप से चलती थी।
  • एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) : यह एक मैकेनिकल मशीन था। जिसे 1830 के दशक में, अंग्रेजी गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) द्वारा डिजाइन किया गया था, जो दुनिया का पहला जनरल पर्पस कंप्यूटर डिजाइन था।
  • टेबुलेटिंग मशीन (Tabulating Machine) : टेबुलेटिंग मशीन एक इलेक्ट्रोमैकेनिकल (Electromechanical) मशीन है, इसमें संख्या पढने का कार्य छेद किये हुए कार्डो द्वारा किया जाता था। इसका आविष्कार हर्मन होलेरिथ (Herman Hollerith) ने किया था, हर्मन होलेरिथ ने टैबुलेटिंग मशीन कंपनी की स्थापना की, जो बाद में आईबीएम (IBM) नामक कंपनी बन गई।
  • मार्क-1 (Mark-1) : 1944 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University) में निर्मित कंप्यूटर, मार्क I, दुनिया का पहला इलेक्ट्रो-मैकेनिकल (Electromechanical) कंप्यूटर था।
  • ENIAC : ENIAC पहला डिजिटल कंप्यूटर था। इसे यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी के बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (Ballistic Research Laboratory) के लिए तोपखाने की फायरिंग तालिकाओं की गणना करने के लिए पेंसिल्वेनिया (Pennsylvania) विश्वविद्यालय में जॉन प्रेस्पर एकर्ट (John Presper Eckert) और जॉन मौच्ली (John Mauchly) द्वारा आविष्कार किया गया था।
  • EDVAC : EDVAC उन पहले इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों में से एक है, जो बाइनरी सिस्टम (Binary system) का उपयोग करता था, यह 30 टन बड़ा, 150 फीट चौड़ा कंप्यूटर था। यह बड़ी गणनाएँ करने का काम करता था।
  • UNIVAC : UNIVAC संयुक्त राज्य अमेरिका में निर्मित पहला व्यावसायिक कंप्यूटर (Commercial Computer) था। यह मुख्य रूप से जॉन प्रेस्पर एकर्ट (John Presper Eckert) और जॉन मौच्ली (John Mauchly) द्वारा डिज़ाइन किया गया था, जो ENIAC के आविष्कारक थे।

जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (Generation of Computer in Hindi)

1940 के बाद कंप्यूटर टेक्नोलॉजी में कई बदलाव हुए हैं, जिससे कहा जा सकता है कि उन्नत कंप्यूटर के विकास में बड़ी क्रांति हुई है। कंप्यूटर में उपयोग की जाने वाली तकनीक के अनुसार, हम कंप्यूटर को पांच प्रमुख पीढ़ियों में वर्गीकृत कर सकते हैं।

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कंप्यूटर के विकास का मुख्य उद्देश्य तेजी से प्रोसेस (Fast Processing) करना, आकार में छोटा (Smaller Size) होना, जिसमें अधिक स्टोरेज (High Storage Capacity) क्षमता हो, और जिसकी लागत कम (Low cost) हो।

  • प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर (First Generation of Computer) : कंप्यूटर की पहली पीढ़ी की शुरुआत 1951 में UNIVAC-1 के आविष्कार के साथ हुई थी। उन कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) का इस्तेमाल किया गया था। यह आकर में बड़ा और अधिक गर्मी पैदा करता था। जिसे ठंडा रखने के लिए वातानुकूलित मशीन (Air-Conditioning Machine) का उपयोग करना पड़ता था, तथा अधिक मात्रा में विद्युत (Electricity) खर्च होती थी।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (Second Generation of Computer) : दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब की जगह, ट्रांजिस्टर (Transistor) का उपयोग किया गया था। यह कंप्यूटर पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में अधिक तेज और इनकी प्रोसेसिंग छमता भी तेज थी। इस दौरान व्यवसाय की दुनिया और उद्योग जगत में कंप्यूटर का उपयोग शुरू हुआ और नई प्रोग्रामिंग भाषाओं (Programming Languages) का विकास हुआ था।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (Third Generation of Computer) : कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी में, ट्रांजिस्टर के बजाय इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का उपयोग किया गया था, जिसे 1958 में जे. एस. किल्वी (J.S. Kilby) द्वारा विकसित किया गया था। इसमें LSI तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। जिसमें एक सिलिकॉन सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप पर हजारों ट्रांजिस्टर का उपयोग किया गया था। जिसे Large-Scale Integration (LSI) के नाम से जाना जाता है। यह पहली पीढ़ी और दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में बहुत तेजी से काम करता था, उनका आकार भी छोटा था और उनकी कीमत भी कम थी।
  • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (Fourth Generation of Computer) : चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर में, LSI IC के बजाय VLSI का उपयोग हुआ, जिसमें एक सिलिकॉन चिप में हजारों इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का उपयोग किया गया था। Very Large Scale Integration (VLSI) तकनीक के उपयोग से माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) का निर्माण हुआ, जिससे कंप्यूटर के आकार में कमी और क्षमता में वृद्धि गई। इस समय के दौरान GUI (Graphical User Interface) विकसित किया गया था, जिससे कंप्यूटर का उपयोग करना और आसान हो गया था।
  • पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर (Fifth Generation of Computer) : पाँचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर में VLSI के बजाय Ultra Large Scale Integration (ULSI) का उपयोग किया जा रहा है, और आज एक चिप (Chip) द्वारा करोड़ों गणना करना संभव है। पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर बहुत छोटे और तेजी से काम करते हैं। पांचवीं पीढ़ी में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वॉयस रिकॉग्निशन, वर्चुअल रियलिटी, इंटरनेट और फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति का विस्तार हुआ है।

कंप्यूटर की विशेषताएं (Characteristics of Computer)

  1. यह तेजी से काम करता है मतलब समय की बचत होती है।
  2. कंप्यूटर बिना त्रुटि के सभी काम करता है। यह कार्य पूरा करने में कोई गलती नहीं करता है।
  3. यह परमानेंट और बड़ी स्टोरेज क्षमता की सुविधा देता है।
  4. कंप्यूटर एक साथ विभिन्न प्रकार के कार्य कर सकता हैं। वे एक ही समय में कई कार्य कर सकता हैं।
  5. आप लॉगिन सिस्टम, पासवर्ड सुरक्षा और एन्क्रिप्शन के साथ अपनी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं।

कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Computer in Hindi)

कंप्यूटर कई प्रकार के होते हैं। कोई कंप्यूटर इतना छोटा है कि आपकी हथेली में आ जाए, तो कोई इतना बड़ा है कि एक इमारत के कई कमरों के स्थान को घेर लेता है। आपके घर में जिस कंप्यूटर का उपयोग होता है वह भी एक प्रकार का कंप्यूटर (Computer) है, जिसे आमतौर पर माइक्रो कंप्यूटर या पर्सनल कंप्यूटर (PC) के रूप में जाना जाता है। कंप्यूटर आकार और प्रकार की तुलना में एक दूसरे से पूरी तरह से अलग है। इसलिये कंप्यूटर के प्रकार को वर्गीकृत करना मुश्किल है, लेकिन हम डाटा प्रोसेसिंग की गति, आकार और अनुप्रयोगों के आधार पर वर्गीकरण कर रहे हैं। मुख्य रूप से कंप्यूटर निम्न प्रकार के होते हैं।

  • आकार के आधार पर (On the Basis of Size)
  1. माइक्रो कंप्यूटर (Microcomputer)
  2. मिनी कॉम्पुटर (Minicomputer)
  3. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer)
  4. सुपर कंप्यूटर (Supercomputer)
  • अनुप्रयोग के आधार पर (On the Basis of Applications)
  1. एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer)
  2. डिजिटल कम्प्यूटर (Digital Computer)
  3. हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer)

हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर क्या है? (Hardware and Software in Hindi)

कंप्यूटर दो भागों से बना है: हार्डवेयर (Hardware) और सॉफ्टवेयर (Software)

  • हार्डवेयर (Hardware) : कंप्यूटर के वे सभी भाग जिन्हें आप देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं और स्पर्श कर सकते हैं उन्हें कंप्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware) कहा जाता है। इन उपकरणों को पेरिफेरल डिवाइस (Peripheral Device) के रूप में भी जाना जाता है। CPU, कीबोर्ड, मॉनिटर, माउस, मॉडेम, CD-ROM, आदि सभी हार्डवेयर के उदाहरण हैं।
  • सॉफ्टवेयर (Software) : सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग भाषा (Programming Language) में लिखे गए निर्देशों (Instructions) का एक समूह होता है, जो प्रोग्रामों (Programs) का एक सेट है जो कंप्यूटर सिस्टम के कार्यों को नियंत्रित करता है और कंप्यूटर के विभिन्न हार्डवेयरों के बीच समन्वय स्थापित करता है ताकि किसी विशेष कार्य को पूरा किया जा सके।

इनपुट एंड आउटपुट डिवाइस (Input and Output Devices in Hindi)

इनपुट/आउटपुट डिवाइस जिन्हें I/O डिवाइस के नाम से जाना जाता है। वे कंप्यूटर (Computer) और उसके उपयोगकर्ता (User) के बीच संचार (Communication) का माध्यम प्रदान करता हैं।

  • इनपुट डिवाइस (Input Device) : इनपुट डिवाइस का उपयोग कंप्यूटर में डेटा और सूचनाओं को इनपुट करने के लिए किया जाता है। कीबोर्ड (Keyboard), माउस (Mouse) और स्कैनर (Scanner) कॉमन इनपुट डिवाइस के उदाहरण हैं।
  • आउटपुट डिवाइस (Output Device) : कंप्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामों को देखने या प्राप्त करने के लिए आउटपुट डिवाइस का उपयोग किया जाता है। मॉनिटर (Monitor), प्रिंटर (Printer) और स्पीकर (Speaker) कॉमन आउटपुट डिवाइस के उदाहरण हैं।

कंप्यूटर के अनुप्रयोग (Application of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है। जैसे कि:

  1. शिक्षा (Education) के क्षेत्र में।
  2. बैंकिंग (Banking) के क्षेत्र में।
  3. वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research) के क्षेत्र में।
  4. चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) के क्षेत्र में।
  5. रक्षा (Defence) के क्षेत्र में।
  6. संचार (Communication) के क्षेत्र में।
  7. मनोरंजन (Entertainment) के क्षेत्र में।
  8. व्यापार (Business) के क्षेत्र में।
  9. प्रकाशन (Publication) के क्षेत्र में।
  10. सुरक्षा (Security) के क्षेत्र में।

कंप्यूटर के फायदे और नुकसान (Advantages and Disadvantages of Computer in Hindi)

कंप्यूटर के फायदे निम्नलिखित हैं:

  • समय की बचत – कंप्यूटर की मदद से हम अपने कई कामों को कुछ घंटों या मिनटों में पूरा कर सकते हैं, जिन्हें पूरा करने में हमें दिन या महीने लग जाते हैं। इससे हमारा समय बचता है।
  • धन की बचत – कंप्यूटर अकेले कई लोगों का काम बिना किसी त्रुटि के कर सकता है, जिसे आपके पैसे की बचत होती है।
  • उत्पादकता में बढ़ोतरी – उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभिन्न उद्योगों में कंप्यूटर से संचालित मशीनों का उपयोग किया जा सकता है। जिससे कम खर्च में अधिक उत्पादन किया जा सके।
  • रोजगार में बढ़ोतरी – कंप्यूटर ने कई नए क्षेत्रों में रोजगार (Employment) के अवसर प्रदान किए हैं क्योंकि कंप्यूटर हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों (Instructions) पर काम करता है।
  • जीवन-स्तर में सुधार – कंप्यूटर के उपयोग के कारण, समाज के जीवन की गुणवत्ता में बहुत सुधार हुआ है, क्योंकि इंटरनेट संचार का सबसे अच्छा माध्यम बन गया है, ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए घर बैठे पैसे का आदान-प्रदान कर सकते हैं, जो आपका समय बचाता है।

कंप्यूटर के नुकसान निम्नलिखित हैं:

  • समय की बर्बादी – कुछ लोग कंप्यूटर का दुरुपयोग कर रहे हैं, वे सारा दिन सोशल मीडिया पर बिताते हैं, कंप्यूटर गेम खेल रहे हैं, ऑनलाइन वीडियो और फिल्में देख रहे हैं और अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।
  • आँखों में कमजोरी – कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग से आंखें सुख जाती हैं, जो हमारी आंखों के लिए हानिकारक है और हमारी आंखों को कमजोर करने का असली कारण है। साथ ही, आंखों पर अधिक दबाव डालकर कंप्यूटर का इस्तेमाल करने से भी आंखों की रोशनी कम हो जाती है।
  • कमर और सिर में दर्द – लंबे समय तक कंप्यूटर का उपयोग करने से कमर (Waist Pain) और सिर में दर्द (Headache) होना एक आम समस्या है। इसलिए आपको ब्रेक जरूर लेना चाहिए।
  • अनिद्रा और डिप्रेशन – वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि 5 घंटे से अधिक कंप्यूटर चलने वालों में अनिद्रा (Insomnia) की शिकायतें अधिक पाई गई हैं। साथ ही, कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने से डिप्रेशन (Depression) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
  • प्राइवेसी का खतरा – हम अपनी सभी फाइलों या किसी भी संवेदनशील डेटा को कंप्यूटर में रखते हैं और उन्हें शेयर करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन इस टेक्नोलॉजी के दौर में, हम अक्सर भूल जाते हैं कि कोई भी टेक्नोलॉजी 100% सुरक्षित नहीं है। इस बीच, यदि हमारा डेटा गलत हाथों में पड़ता है, तो यह हमारी प्राइवेसी (Privacy) के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।

इन्हें भी देखें –

निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा है, सभी सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में कंप्यूटर का ज्ञान अनिवार्य हो गया है। साथ ही, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनिवार्य रूप से कंप्यूटर की परीक्षा ली जा रही है। इसलिए हमें “फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर (Computer Fundamental in Hindi)” के बारे में जानना बहुत जरूरी है। मुझे उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी, और इसे पढ़ने से निश्चित रूप से आपके कंप्यूटर ज्ञान में वृद्धि होगी। हालाँकि, यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो आप कमेंट कर सकते हैं, यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई है, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें।

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