C++ प्रोग्रामिंग क्या है, कैसे सीखें? हिन्‍दी में पढ़ें।

Last updated on मई 1st, 2018 at 01:24 पूर्वाह्न

C++ प्रोग्रामिंग से परिचय (Introduction to C ++ Programming)

C++ प्रोग्रामिंग क्या है, कैसे सीखें (C++ Programming in Hindi)आज हम सीखेंगे की “C++ प्रोग्रामिंग क्या है, कैसे सीखें?” (C++ Programming in Hindi) जैसा की हम जानते है की C++ एक मध्यम स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (Medium Level Programming Language) है। जिसे 1980 की शुरुआत में, बेल लेबोरेटरीज में, सी + + प्रोग्रामिंग भाषा का विकास बजर्नी स्त्रौस्त्रूप (Bjarne Stroustrup) ने किया था। यह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ‘C प्रोग्रामिंग भाषा‘ (C Programming Language) पर आधारित है। यह पहले से उपलब्ध C प्रोग्रामिंग भाषा का एक उन्नत रूप है, जिसे हम C ++ प्रोग्रामिंग भाषा के रूप में जानते है। C ++ प्रोग्रामिंग का मुख्य उद्देश्य ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड अवधारणाओं को पहले से उपलब्ध C प्रोग्रामिंग में जोड़ना था। आज के समय में, ऑबजेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग को प्रोग्रामिंग में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। C ++ प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए प्रोग्राम ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे की यूनिक्स, लिनक्स, विंडोज इत्यादि पर चलाए जा सकते हैं। ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड अवधारणाओं का उपयोग करने के लिए क्लासेज (Classes) बनाई गई हैं, इन क्लासेज को यूजर डिफाइंड डाटा टाइप (User Defined Data Type) कहा जाता है। इसमें ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग के सभी गुण शामिल है, जैसे की C ++ Inheritance, Data Hiding, Encapsulation, Abstraction, Polymorphism आदि इसी बजह से इसे ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में उपयोग किया जाता है।

ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग के सिद्धांत (Object Oriented Programming Principles in C ++)

  • Class–जैसा की हम जानते है क्लास (Class) एक यूजर डिफाइंड डाटा टाइप (User Defined Data Type) होती है, यह C प्रोग्रामिंग में स्ट्रक्चर (Structure) की तरह होता है मगर क्लासेज में हम वेरिएबल (Variable) के साथ ही उनसे रिलेटेड फंक्शन (Related Function) भी बना (Create) सकते है और ऑब्जेक्ट्स (Objects) के जरिये एक्सेस (Access) कर सकते है। यह एक प्रोग्रामर को डाटा सेंटरड एप्रोच (Data Centered Approach) प्रदान करती है। क्लास के जरिये हम वेरिएबल्स (Variables) और उनसे संबंदित फंक्शन (Related Function) को अलग (Separate) कर सकते है।
  • Objects–जैसा की हमने ऊपर पढ़ा की क्लास एक यूजर डिफाइंड डाटा टाइप (User Defined Data Type) होता है और क्लास टाइप (Class Type) के वेरिएबल्स (Variables) को ऑब्जेक्ट्स (Objects) के नाम से जाना जाता है, ऑब्जेक्ट के जरिये आप वेरिएबल्स और फंक्शन्स को एक्सेस कर सकते है।
  • Abstraction— Abstraction का अर्थ होता है की एंड यूजर (End User) को वही फंक्शनलिटी (Functionality) दीखाई जाये जिनकी उसको जरुरत है और बैकग्राउंड फंक्शनलिटी (Background Functionality) हाईड (Hide) कर दी जाये।
  • Encapsulation–एन्काप्सुलेसन को हम डाटा हाईडदिंग (Data Hiding) भी कहते है, यह एक ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग (Object Oriented Programming) फीचर (Feature) है जो वेरिएबल्स (Variables) और उनसे रिलेटेड फंक्शन (Related Function) को Bind करता है। जैसे की क्लास (class) होता है। इसके साथ ही एन्काप्सुलेसन (Encapsulation) के जरिये डाटा (Data) और फंक्शन (Functions) को आउटसाइड एक्सेस (Outside Access) से भी प्रोटेक्ट किया जाता है। एन्काप्सुलेसन प्रॉपर्टीज 3 लेवल (Public, Private, Protected) का प्रोटेक्शन देती है। C++ में एन्काप्सुलेसन क्लासेज के माध्यम से इम्प्लेमेंत किया जाता है।
  • Inheritance–इनहेरिटेंस (Inheritance) ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग का एक कांसेप्ट (concept) है जिसमे एक कोड को दूसरी जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह Principle Code Re-usability Implement करती है। जैसे की आप एक क्लास (Class) में क्रिएट (Create) किये गए फंक्शनस (Functions) को दूसरी क्लास (Class) में इन्हेरिट कर सकते है, इस प्रकार आपको इन फंक्शनस को दुबारा लिखने की जरुरत नहीं परेगी और आप इन दोनों ही क्लासेज के ऑब्जेक्ट्स से एक्सेस कर पाएंगे।
  • Polymorphism–पोल्य्मोर्फिस्म (Polymorphism) का सीधा सा अर्थ यह है की इसमें आप एक नाम से कई तरह के टास्कस (Tasks) इम्प्लेमेंत कर सकते है।  C++ में पोल्य्मोर्फिस्म फंक्शन ओवरलोडिंग (Polymorphism Function Overloading) के द्वारा इम्प्लेमेंत किया जाता है जिसमें एक नाम के फंक्शनस को अलग अलग कंडीशनस में एक्सीक्यूट (Execute) किया जाता है।
  • Message Passing–मेसेज पासिंग (Message passing) ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में ऑब्जेक्ट्स एक दूसरे से कम्यूनिकेट करते है, जिससे प्रोग्राम रियल लाइफ कंडीशन (Program Real Life Condition) को दर्शाता है।

C++ प्रोग्रामिंग भाषा की विशेषताएं (Features of C++ Programming Language)

C ++ ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग भाषा है और यह एक बहुत ही सरल और आसान भाषा है, इस भाषा में निम्नलिखित विशेषताएं हैं:

  • Simple
  • Object Oriented
  • Powerful
  • Case Sensitive
  • Portability
  • Platform Dependent
  • Syntax Based Language
  • Compiler Based
  • Efficient Use of Pointers
  • Rich Library
  • Memory Management
  • Fast Speed
  • Recursion
  • Extensible
  • Machine Independent Language
  • Low Level as Well as High Level
  • Easy to Learn
C++ प्रोग्राम का एक उदाहरण (An Example of a C ++ Program)

Output :

C++ सीखना महत्वपूर्ण क्यों है? (Why is it Important to Learn C ++?)

दोस्तों, C++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखना हमारे लिए काफी आवश्यक है क्योंकि वर्तमान में जितने भी आधुनिक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, वह सभी के सभी ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग सिस्टम पर आधारित है और C++ एक ऐसी प्रोग्रामिंग भाषा है जिसमे आप ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग (OOPS) के नियमों को काफी आसानी से इम्प्लेमेंत कर सकते है, सरल शब्दों में C++  में ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग कॉन्सेप्ट्स काफी आसानी और सुविधापूर्ण तरीके से सीखा जा सकता है क्योंकि यह C प्रोग्रामिंग भाषा का उन्नत रूप है और इसमें कई सारे सुधार कर इसे डेवेलप किया गया है अत:  C++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखना महत्वपूर्ण है।

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