डाटा कम्युनिकेशन क्या हैं? (जानिये हिंदी में)

डाटा कम्युनिकेशन क्या है? (What is Data Communication in Hindi)

डाटा कम्युनिकेशन क्या हैं (Data Communication in Hindi)आज हम सीखेंगे की डाटा कम्युनिकेशन क्या हैं? (Data Communication in Hindi) जैसा की हम जानते है की आजकल की आधुनिक दुनिया में कंप्यूटर स्टैंड-अलोन सिस्टम के रूप में काम नहीं करता है बल्कि संचार प्रणाली के हिस्से के रूप में काम करता है। कंप्यूटर के अलावा जहाज, विमान, रॉकेट, उपग्रहों और कई अन्य जटिल प्रणालियाँ अपने नेविगेशन सिस्टम के लिए संचार प्रणाली (Communication System) पर भरोसा करती हैं। सरल शब्दों में, डाटा कम्युनिकेशन (Data Communication) ट्रांसमिशन मीडियम (Transmission Medium) के माध्यम से दो उपकरणों के बीच डेटा का आदान-प्रदान होता है। डेटा किसी भी संचार माध्यम पर डिजिटल या एनालॉग सिगनल (Digital or Analog Signal) के रूप में प्रसारित किया जाता है। कंप्यूटर नेटवर्किंग (Computer Networking) में नेटवर्किंग उपकरणों के बीच भौतिक कनेक्शन केबल मीडिया या वायरलेस मीडिया के माध्यम से स्थापित किया जाता है। डाटा कम्युनिकेशन का सबसे अच्छा उदाहरण इंटरनेट (Internet) है अर्थात डेटा संचार दो या दो से अधिक कंप्यूटर केंद्रों के बीच डिजिटल या एनालॉग डेटा सिगनल्स का आदान-प्रदान होता है, जो संचार चैनल से जुड़े हुये होते हैं। ट्रांसमिशन के विभिन्न तरीके सिम्पलेक्स (Simplex), अर्द्ध ड्यूप्लेक्स (Half Duplex), और पूर्ण डुप्लेक्स (Full Duplex) हैं।

डाटा कम्युनिकेशन के प्रकार (Types of Data Communication in Hindi)

  1. सिम्पलेक्स (Simplex): सिम्पलेक्स मोड में, कम्युनिकेशन यूनिडायरेक्शनल होता है। केवल एक डिवाइस डेटा संचारित कर सकता है जबकि अन्य डिवाइस केवल डेटा प्राप्त कर सकता है। उदाहरण के लिए, कीबोर्ड (Keyboard) और सीपीयू (CPU) के बीच संचार एक सिम्पलेक्स ट्रांसमिशन मोड (Simplex Transmission Mode) का पालन करता है। इस मोड में, कीबोर्ड केवल डेटा भेज सकता है और सीपीयू केवल डेटा प्राप्त कर सकता है।
  2. अर्द्ध ड्यूप्लेक्स (Half Duplex): अर्द्ध ड्यूप्लेक्स ट्रांसमिशन में, दोनों डिवाइस डेटा संचारित और प्राप्त कर सकते हैं लेकिन एक साथ नहीं। जब एक डिवाइस संचारित होता है, तो अन्य डिवाइस केवल प्राप्त कर सकता है। उदाहरण वॉकी-टॉकी (walkie-talkie)।
  3. पूर्ण ड्यूप्लेक्स (Full Duplex): पूर्ण डुप्लेक्स मोड में, दोनों कनेक्टेड डिवाइस एक ही समय में डेटा भेज सकते हैं और साथ ही डेटा प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण टेलीफोन (Telephone)।डाटा कम्युनिकेशन के प्रकार (Types of Data Communication in Hindi)

डाटा कम्युनिकेशन के घटक (Components of Data Communication in Hindi)

  • ट्रांसमीटर/प्रेषक (Transmitter/Sender): ट्रांसमीटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो एंटीना (Antenna) की सहायता से रेडियो तरंगों का उत्पादन करता है। ट्रांसमीटर का उपयोग दूरसंचार (Telecommunication) में रेडियो तरंगों का उत्पादन और प्रसारित करने के लिए किया जाता है। संदेश ट्रांसमीटर डिवाइस की मदद से भेजा जाता है।
  • रिसीवर/प्राप्तकर्ता (Receiver): संचार प्रणाली में ट्रांसमीटर/प्रेषक द्वारा भेजा गया संदेश रिसीवर (Receiver) द्वारा प्राप्त किया जाता है।
  • संदेश (Message): संदेश टेक्‍स्‍ट (Text), नंबर्स (Numbers), संकेतों (Signs), प्रतीकों (Symbols), इमेज (Images), साउंड (Sound), वीडियो (Video) द्वारा व्यक्त की गई जानकारी (डाटा) होती है।
  • माध्यम (Medium): ट्रांसमिशन माध्यम (Transmission Medium) वह माध्यम है जिसके माध्यम से हम डेटा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजते हैं, जिसे ट्रांसमिशन या संचार मीडिया (Transmission Media) कहा जाता है। ट्रांसमिशन मीडिया प्रकारों की चार मुख्य श्रेणियां हैं: अनशिल्ड ट्विस्टेड पेयर (UTP), शील्डेड ट्विस्टेड पेयर (STP), और कोएक्सियल केबल और फाइबर ऑप्टिक केबल (FOC) शामिल हैं।
  • प्रोटोकॉल (Protocol): दूरसंचार में, प्रोटोकॉल डेटा संचार करने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों का एक सेट होता है। जो दो या दो से अधिक कंप्यूटरों के बीच संचार के दौरान प्रत्येक चरण और प्रक्रिया के लिए नियम परिभाषित किए जाते हैं। डेटा को सफलतापूर्वक संचारित करने के लिए नेटवर्क को इन नियमों का पालन करना होता है।डाटा कम्युनिकेशन के घटक (Components of Data Communication in Hindi)
डाटा कम्युनिकेशन के माध्यम (Data Communication Medium)
  • स्टैंडर्ड टेलीफोन लाइन (Standard Telephone Line)
  • कोएक्सिअल केबल (Coaxial Cable)
  • ट्विस्टेड पेयर केबल (Twisted Pair Cable)
  • फाइबर ऑप्टिक केबल (Fiber Optic Cable)
  • माइक्रोवेव ट्रांसमिशन (Microwave Transmission)
  • उपग्रह संचार (Satellite Communication)
डाटा कम्युनिकेशन के लाभ (Benefits of Data Communication in Hindi)
  • डाटा को भौतिक रूप से भेजने की तुलना में व्यतीत होने वाले समय की बचत होना।
  • आधुनिक कंप्यूटर की प्रोसेसिंग स्पीड और भंडारण क्षमता का पूर्ण उपयोग होना।
  • संवेदनशील डेटा का एन्क्रिप्शन (Encryption) के माध्यम से सुरक्षित ट्रांसमिशन होना।
  • फाइल कॉपी होने से बचाव होना।
  • कम लागत में डेटा का आदान-प्रदान होना।

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